किन्तु कोई-कोई दानशीलता, पितृ कर्मानुष्ठान (तर्पण, श्राद्धादि कर्म) तथा सगुणोपासना के प्रशंसक हुआ करते हैँ। इसके अतिरिक्त कुछ मनुष्य मोह-माया से विरत होकर मन मेँ वैराग्य धारण करना ही श्रेष्ठ मानते हैँ।
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