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शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 49
यद्भूतं यच्च॒ भाव्यं वै मूर्तामूर्ते तथैव च । सर्वमेव जगदिदं विवृतं परमात्मनि ।।
संसार के मूर्त-अमूर्तं जो भी पदार्थ है वे सभी माया के आवरण से आत्मा द्वारा ही प्रकटित हए हैँ।
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