जिस प्रकार वायु के थपेड़ से सागर में ज्याग उठते ओर बुलबुले उत्पन्न होते रहते हैँ तथा पुनः तत्क्षण ही उसमें समा जाते है, उसी प्रकार माया की उपाधि से विभूषित आत्मा के द्वारा नश्वर संसार की उत्पत्ति होती ओर पुनः उसी आत्मा मे विलुप्त हो जाती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।