मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 46
आगमाऽपायिनोऽनित्या नाश्यत्वे नेश्चवरादयः । आत्मबोधेन केनापि शास्त्रादेतद्विनिश्चितम्‌ ।।
आत्मज्ञान-सम्बन्धी शास्त्र के अध्ययन से यह ज्ञात होता है कि ईश्वर की उपाधि से युक्त इन्द्रादि देव भी अनित्य हैँ अर्थात्‌ उनका भी संसार में जन्म-मरण होता रहता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें