मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 4
सत्यं केचित्‌ प्रशंसन्ति तपः शौचं तथापरे । क्षमां केचित्मशंसन्ति तथैव सममार्ज्जवम्‌ ।।
कुछ लोग सत्य की सराहना करते है तो कुछ लोग तपश्चर्या की। इसके विपरीत कुछ व्यक्ति शुद्धाचरण, क्षमाशीलता, सरलता तथा सभी जीवों मे समत्व की भावना रखना ही श्रेयस्कर समझते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें