मनुष्य को इहलोक तथा परलोक के फलों एवं नित्य-नैमित्तिक फलों की इच्छा का परित्याग कर केवल योगाभ्यास की साधना में निरत रहना ही मोक्षप्राप्ति का कारण बनता है।
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