मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 29
तत्कर्म कल्पकैः प्रोक्तं पुण्यपापमिति द्विधा । पुण्यपापमयो बन्धो देहिनां भवति क्रमात् ।।
सुविज्ञ पुरुषों ने पाप-पुण्य के रूप में दो प्रकार के कर्मों की परिकल्पना की है। उन्हीं पाप-पुण्य के कर्मानुसार शरीर आबद्ध है जिसके परिणामस्वरूप जीव को संसार में बार-बार जन्म लेना पड़ता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें