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शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 28
स्वर्गेऽपि दुःखसम्भोगः परस्त्रीदर्शनाद्‌ध्रुवम् । ततो दुःखमिदं सर्वं भवेन्नास्त्यत्र संशयः ।।
यदि गम्भीरतापूर्वक विचार किया जाय तो स्वर्ग भी दुःख का ही एक स्थान है, क्योंकि स्वर्ग में पहुँचकर स्वर्गीय ललनाओं (अप्सराओं) के दर्शन तो होते हैं किन्तु उनकी प्राप्ति सम्भव नहीं होती जिसके कारण मानसिक क्लेश भोगने पड़ते हैं। अतः स्वर्गप्राप्ति भी दुःख का ही कारण है। इसमें किसी प्रकार का संदेह नहीं रखना चाहिए।
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