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शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 27
पापभोगावसाने तु पुनर्जन्म भवेत्खलु । पुण्यभोगावसाने तु नान्यथा भवति ध्रुवम् ।।
जिस प्रकार पापफल का भोग भुगत लेने पर जीव का इस संसार में पुनरावर्तन होता है उसी प्रकार पुण्यफल भोग लेने के पश्चात् पुण्यात्मा जीव को भी पुनर्जन्म लेना पड़ता है। इस प्रकार जन्म-मरण का चक्र बराबर घूमता रहता है।
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