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शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 25
जन्तुभिश्चानुभूयन्ते स्वर्गे नानासुखानि च । नानाविधानि दुःखानि नरके दुःसहानि वै ।।
इस जीव को स्वर्गलोक की प्राप्ति होने पर उसे नाना प्रकार के सुखों का उपभोग करना पड़ता है, किन्तु नरकगामी होने पर उसे अनेक प्रकार के कठोर दुःखों की यातना भी सहनी पड़ती है।
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