योगशास्त्रमिदं गोप्यमस्माभिः परिभाषितम् ।
सुभक्ताय प्रदातव्यं त्रैलोक्ये च महात्मने ।।
देवी पार्वती से शिवजी कहते हैं कि मेरे द्वारा कथित यह योगशास्त्र अत्यन्त गोपनीय है। अतः इसे त्रैलोक्य में ऐसे व्यक्ति को बतलाना चाहिए जो ईश्वरभक्तिपरायण और सन्त हो।
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