इस विषय में ज्ञानोपलब्धि होने पर इसके लिए परिश्रम करना उचित तथा आवश्यक है। जब इसके अतिरिक्त अन्य शास्त्र निरुद्देश्य सिद्ध होते हैं तो उन शास्त्रों में ज्ञानप्राप्ति हेतु किया जाने वाला परिश्रम भी व्यर्थ ही है।
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