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शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 12
ज्ञानप्रवाह इत्यन्ये शून्यं केचित्परं विदुः । द्वावेव तत्त्वं मन्यन्तेऽपरे प्रकृतिपुरुषौ ।।
उसके अतिरिक्त और कुछ भी नहीं है। शून्यवादियों का मानना है कि जगत में शून्य के सिवाय दूसरा कुछ नहीं है। कोई-कोई प्रकृति और पुरुष को तत्त्वरूप में समझते हैं।
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