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शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 11
यद्यत्प्रत्यक्षविषयं तदन्यन्नास्ति चक्षते । कुतः स्वर्गादयः सन्तीत्यन्ये निश्चितमानसाः ।।
प्रत्यक्षवादियों के मतानुसार इस जगत में दिखायी पड़ने वाली वस्तुएँ ही केवल सत्य है, शेष सभी मिथ्या हैं। वे निश्चयतापूर्वक यही कहते हैं कि इस पृथिवी के अतिरिक्त स्वर्गादि लोक नहीं होते। कुछ विद्वानों का ऐसा अभिमत है कि प्रवहमान ज्ञानधारा ही सब कुछ है।
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