शिवजी कहते हैं कि मैं समस्त जीवों को उनके कर्मानुसार ही उत्पत्र किया करता हूँ। मैं सभी भूतों से भिन्न और अविनाशी होते हुए भी जड़स्वरूप होकर उन सभी को अपना ग्रास बना लेता हूँ।
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