मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 101
तत्पञ्चीकरणात्स्थूलान्यसंख्यानिचराचरम् ब्रह्माण्डस्थानि वस्तूनि यत्र जीवोऽस्ति कर्मभिः । तद्भुतपंचकात्सर्वं भोगाय जीवसंज्ञिता ।।
इस संसार में पंचभूतों के पंचीकरण के फलस्वरूप स्थूल रूप से चराचर जगत की अनेक रूपों में सृष्टि होती है। अपने सद-असद् कर्मानुसार फलोपभोग करने के लिए ही यह जीव पंचभूतों के द्वारा निर्मित इस संसार में जन्म लेता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें