इस संसार में पंचभूतों के पंचीकरण के फलस्वरूप स्थूल रूप से चराचर जगत की अनेक रूपों में सृष्टि होती है। अपने सद-असद् कर्मानुसार फलोपभोग करने के लिए ही यह जीव पंचभूतों के द्वारा निर्मित इस संसार में जन्म लेता है।
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