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शिव संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 10
अन्यैर्मतिमतां श्रेष्ठैर्गुप्तालोकनतत्परैः । आत्मानो बहवः प्रोक्ता नित्याः सर्वगतास्तथा ।।
कुछेक विद्वान गुप्तशास्त्रों में अध्ययनरत रहने को ही उत्तम मानते हैं, किन्तु कुछ मनुष्यों की ऐसी अवधारणा होती है कि आत्मा ही शाश्वतस्वरूप है और वह सर्वत्र गमनशील भी है।
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