पञ्चैतास्तु यतेर्मात्रास्ता मात्रा ब्रह्मणे श्रुताः।
न त्यजेद्यावदुत्क्रान्तिरन्तेऽपि निखनेत्सह ॥
यति की ये पाँचों मात्राएँ ही ब्रह्म (ॐकार) में समाहित हैं। इनका त्याग कभी नहीं करना चाहिए। इन सभी को मृत्यु के उपरान्त शरीर के साथ ही भूमि में गाड़ देना चाहिए।
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