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शाट्यायनीय • अध्याय 1 • श्लोक 7
अथाश्रमं चरमं संप्रविश्य यथोपपत्तिं पंञ्चमात्रां दधानः॥
इसके बाद अन्तिम संन्यास आश्रम में प्रविष्ट होकर के यथाबल त्रिदण्ड आदि पंच मात्राओं को स्वीकार करता हुआ मोक्ष को प्राप्त करे।
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