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शाट्यायनीय • अध्याय 1 • श्लोक 41
यस्य देवे परा भक्तिर्यधा देवे तथा गुरौ। स ब्रह्मवित्परं प्रेयादिति वेदानुशासनम् इत्युपनिषत् ।।
जिस पुरुष की देवताओं में परम भक्ति होती है एवं जैसे देवताओं में वैसे ही गुरु में भी उसकी परम भक्ति होती है। ऐसा (पुरुष) ब्रह्मज्ञानी परम पद की प्राप्ति करता है, ऐसा वेदानुशासन है, वेद की आज्ञा (आदेश) है। इस प्रकार यह उपनिषद् (विद्या) पूर्ण हुई।
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