विद्वान् धर्मिष्ठ संन्यासी तीस पर (बाद की), तीस अपर (पूर्व की) एवं तीस पर से भी पर (बाद से बाद की) पीढ़ियों-पूर्वजों को तार देता है, ऐसा श्रुति का वचन है।
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