समस्त उपनिषदों का अभ्यास (पाठ) स्वाध्याय यज्ञ कहा गया है। 'ॐ' इस प्रकार उच्चारण करते हुए ब्रह्मरूपी अग्नि में ही आत्मा की आहुति दी जाती है अर्थात् आत्मा को ब्रह्म में विलीन किया जाता है।
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