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शारीरिक • अध्याय 1 • श्लोक 8
अहिंसा सत्यमस्तेयब्रह्मचर्यापरिग्रहाः । अक्रोधो गुरुशुश्रूषा शौचं संतोष आर्जवम् ॥ अमानित्वमदम्भित्वमास्तिकत्वमहिंस्रता। एते सर्वे गुणाः ज्ञेयाः सात्त्विकस्य विशेषतः ॥
अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह, क्रोध न करना, गुरु की सेवा करना, शुचिता (पवित्रता), संतोष, सरलता, अमानिता का भाव, दम्भ न करना, आस्तिकता, हिंसा न करना आदि ये सभी गुण विशेषतया सात्त्विक स्वभाव वाले मनुष्यों के कहे गये हैं।
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