अस्थि, त्वचा, नाड़ी, रोमकूप तथा मांस— ये सभी पृथ्वी तत्त्व के अंश हैं।
मूत्र, कफ, रक्त, शुक्र तथा स्वेद (पसीना)— जल तत्त्व के अंश हैं।
क्षुधा, पिपासा, आलस्य, मोह और मैथुन— अग्रि तत्त्व के अंश हैं।
फैलाना, दौड़ना, गति करना (चलना), उड़ना, पलकों को संचालित करना आदि— वायु तत्त्व के अंश हैं और काम, क्रोध, लोभ, मोह, भय आदि— आकाश तत्त्व के अंश हैं।
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