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शारीरिक • अध्याय 1 • श्लोक 4
मनोबुद्धिरहंकारश्चित्तमित्यन्तःकरणचतुष्टयम्। तेषां क्रमेण संकल्पविकल्पाध्यव- सायाभिमानावधारणास्वरूपाश्चैते विषयाः। मनःस्थानं गलान्तं बुद्धेर्वदनमहंकारस्य हृदयं चित्तस्य नाभिरिति ॥
मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार इन चारों को अन्तःकरण (चतुष्टय) कहा गया है। इनके विषय क्रमशः इस प्रकार हैं - १. संकल्प-विकल्प, २. निश्चय, ३. अवधारणा और ४. अभिमान। मन का क्षेत्र गले का अन्तिम भाग, बुद्धि का स्थान मुख, चित्त का क्षेत्र नाभि और अहंकार का क्षेत्र हृदय बताया गया है।
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