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शारीरिक • अध्याय 1 • श्लोक 12
सत्यज्ञानं सात्त्विकम्। धर्मज्ञानं राजसम्। तिमिरान्धं तामसमिति ॥
पूर्णसत्य (ब्रह्म) ज्ञान सात्विक है। धर्मज्ञान राजस है और अन्धकार से युक्त अर्थात् तिमिरान्ध (अधर्ममूढ़ता) ही तामस है।
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