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षड्जगीता • अध्याय 1 • श्लोक 9
समाप्तवचने तस्मिन्नर्थशास्त्रविशारदः । पार्थो वाक्यार्थतत्त्वज्ञो जगौ वाक्यमतन्द्रितः ॥
वैजश्ञम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! विदुरजी की बात समाप्त होने पर धर्म और अर्थ के तत्त्व को जानने वाले अर्थशास्त्रविशारद अर्जुन ने युधिष्ठि की आज्ञा पाकर कहा।
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