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षड्जगीता • अध्याय 1 • श्लोक 7
धर्मेणैवर्षयस्तीर्णा धर्मे लोकाः प्रतिष्ठिताः । धर्मेण देवा दिविगा धर्मे चार्थः समाहितः ॥
धर्म से ही ऋषियों ने संसार-समुद्र को पार किया है। धर्म पर ही सम्पूर्ण लोक टिके हुए हैं। धर्म से ही देवताओं की उन्नति हुई है और धर्म में ही अर्थ की भी स्थिति है।
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