मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
षड्जगीता • अध्याय 1 • श्लोक 47
न कर्मणाप्नोत्यनवाप्यमर्थं यद्भावि सर्वं भवतीति वित्त । त्रिवर्गहीनोऽपि हि विन्दतेऽर्थं तस्मादिदं लोकहिताय गुह्यम् ॥
मनुष्य कर्म द्वारा अप्राप्य अर्थ नहीं पा सकता। जो होनहार है, वही होती है; इस बात को तुम सब लोग जान लो। मनुष्य त्रिवर्ग से रहित होने पर भी आवश्यक पदार्थ को प्राप्त कर लेता है; अतः मोक्षप्राप्ति का गूढ़ उपाय (ज्ञान) ही जगत का वास्तविक कल्याण करने वाला है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
षड्जगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

षड्जगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें