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षड्जगीता • अध्याय 1 • श्लोक 46
एतत्प्रधानं न तु कामकारो यथा नियुक्तोऽस्मि तथा चरामि । भूतानि सर्वाणि विधिर्नियुङ्क्ते विधिर्बलीयानिति वित्तसर्वे ॥
इस प्रकार विचार करना ही मोक्ष का प्रधान उपाय है, स्वेच्छाचार नहीं। विधाता ने मुझे जिस कार्य में लगा दिया है, मैं उसे ही करता हूँ। विधाता सभी प्राणियों कों विभिन्‍न कार्यों के लिये प्रेरित करता है। अतः आप सब लोगों को ज्ञात होना चाहिये कि विधाता ही प्रबल है।
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