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षड्जगीता • अध्याय 1 • श्लोक 44
भूतानि जाती मरणान्वितानि जरा विकारैश्च समन्वितानि । भूयश्च तैस्तैः प्रतिबोधितानि मोक्षं प्रशंसन्ति न तं च विद्मः ॥
जो पूर्वजन्म की बातों को स्मरण करने वाले तथा वृद्धावस्था के विकार से युक्त हैं, वे मनुष्य नाना प्रकार के सांसारिक दुःखों के उपभोग से निरन्तर पीड़ित हो मुक्ति की ही प्रशंसा करते हैं, परंतु हम लोग उस मोक्षे के विषय में जानते ही नहीं हैं।
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