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षड्जगीता • अध्याय 1 • श्लोक 40
प्राज्ञः सुहृच्चन्दनसारलिप्तो विचित्रमाल्याभरणैरुपेतः । ततो वचः सङ्ग्रहविग्रहेण प्रोक्त्वा यवीयान्विरराम भीमः ॥
बुद्धिमानू, सुहृदू, चन्दनसार से चर्चित तथा विचित्र मालाओं और आभूषणों से विभूषित भीमसेन उन वीरबन्धुओं से संक्षेप और विस्तारपूर्वक पूर्वोिक्त वचन कहकर चुप हो गये।
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