पुष्पो मध्विव रसः काम आशभ्यां तथा स्मृतः।
कामो धर्मार्थयोर्योनि: कामएचाथ तदात्मकः॥
जैसे फूल से उसका मधु-तुल्य रस श्रेष्ठ है, उसी प्रकार धर्म और अर्थ से काम श्रेष्ठ माना गया है। काम धर्म और अर्थ का कारण है, अत: वह धर्म और अर्थरूप है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
षड्जगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
षड्जगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।