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षड्जगीता • अध्याय 1 • श्लोक 35
पुष्पो मध्विव रसः काम आशभ्यां तथा स्मृतः। कामो धर्मार्थयोर्योनि: कामएचाथ तदात्मकः॥
जैसे फूल से उसका मधु-तुल्य रस श्रेष्ठ है, उसी प्रकार धर्म और अर्थ से काम श्रेष्ठ माना गया है। काम धर्म और अर्थ का कारण है, अत: वह धर्म और अर्थरूप है।
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