मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
षड्जगीता • अध्याय 1 • श्लोक 31
वणिजः कर्षका गोपाः कारवः शिल्पिनस्तथा । दैवकर्म कृतश्चैव युक्ताः कामेन कर्मसु ॥
व्यापारी, किसान, ग्वाले, कारीगर और शिल्पी तथा देव-सम्बन्धी कार्य करने वाले लोग भी कामना से ही अपने-अपने कर्मो में लगे रहते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
षड्जगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

षड्जगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें