किसी-न-किसी कामना से संयुक्त होकर ही ऋषिलोग तपस्या में मन लगाते हैं। फल, मूल और पत्ते चबाकर रहते हैं। वायु पीकर मन और इन्द्रियों का संयम करते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
षड्जगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
षड्जगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।