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षड्जगीता • अध्याय 1 • श्लोक 23
योऽर्थो धर्मेण संयुक्तो धर्मो यश्चार्थसंयुतः । मध्विवामृत संयुक्तं तस्मादेतौ मताविह ॥
जो धन धर्म से युक्त हो और जो धर्म धन से सम्पन्न हो, वह निश्चितरूप से आपके लिये अमृत के समान होगा, यह हम दोनों का मत है।
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