आसीनश्च शयानश्च विचरन्नपि च स्थितः ।
अर्थयोगं दृढं कुर्याद्योगैरुच्चावचैरपि ॥
नकुल-सहदेव बोले - महाराज! मनुष्य को बैठते, सोते, घूमते-फिरते अथवा खड़े होते समय भी छोटे-बड़े हर तरह के उपायों से धन की आय को सुदृढ़ बनाना चाहिये।
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