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षड्जगीता • अध्याय 1 • श्लोक 14
उद्भूतार्थं हि पुरुषं विशिष्टतर योनयः । ब्रह्माणमिव भूतानि सततं पर्युपासते ॥
जैसे सब प्राणी सदा ब्रह्माजी की उपासना करते हैं, उसी प्रकार उत्तम जाति के मनुष्य भी सदा धनवान्‌ पुरुष की उपासना किया करते हैं।
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