विषयैरर्थवान् धर्ममाराधयितुमुत्तमम् ।
काम॑ च चरितुं शक्तो दुष्प्रापमकृतात्मभि:
धनवान मनुष्य धन के द्वारा उत्तम धर्म का पालन और अजितेन्द्रिय पुरुषों के लिये दुर्लभ कामनाओं की प्राप्ति कर सकता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
षड्जगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
षड्जगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।