मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सौन्दर्यलहरी • अध्याय 2 • श्लोक 7
अहः सूते सव्यं तव नयनमर्कात्मकतया त्रियामां वामं ते सृजति रजनीनायकतया । तृतीया ते दृष्टिर्दरदलितहेमाम्बुजरुचिः समाधत्ते संध्यां दिवसनिशयोरन्तरचरीम् ॥
(तीन नेत्रों का ध्यान) तेरा दक्षिण नेत्र सूर्यात्मक होने से दिन बनाता है, और बायां चन्द्रात्मक होने से रात्रि की सृष्टि करता है और किंचित् विकसित सुवर्ण के बने हुए कमल की शोभा से युक्त तेरी तीसरी दृष्टि दिन और रात दोनों के बीच में रहने वाली संध्या है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सौन्दर्यलहरी के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सौन्दर्यलहरी के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें