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सौन्दर्यलहरी • अध्याय 2 • श्लोक 63
॥ इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ सौन्दर्यलहरी सम्पूर्णा ॥ ॥ ॐ तत्सत् ॥
इसके साथ ही सौन्दर्य लहरी समाप्त होती है।
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