(भगवती की सपर्या की असुलभता)
तू त्रिपुरारि के अन्त:पुर की रानी है इसलिये तेरे चरणों की सपर्या पूजा की मर्यादा चंचल इंद्रियों वाले मनुष्यों को सुलभ नहीं और इन्द्र की प्रमुखता में रहने वाले ये देवगण तेरे द्वार के निकट खडी रहने वाली अणिमादि की अतुल सिद्धियों तक ही पहुंच पाते हैं।
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