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सौन्दर्यलहरी • अध्याय 2 • श्लोक 54
कलङ्कः कस्तूरी रजनिकरबिम्बं जलमयं कलाभिः कर्पूरैर्मरकतकरण्डं निबिडितम् । अतस्त्वद्भोगेन प्रतिदिनमिदं रिक्तकुहर विधिर्भूयो भूयो निबिडयति नूनं तव कृते ॥
(शृङ्गार के डिब्बे का ध्यान) चन्द्र बिंब एक मरकत मणि के बने हुए डिब्बे के सदृश है, उसका कलङ्क (काला धब्बा ) कस्तूरी का काला रंग है और चमकती हुई कलाये कपूर सदृश हैं, दोनों को जल में पीसकर तेरे आभोग के लिये डिब्बे में भरकर रखा हुआ है, जो प्रतिरात्रि खर्च होता रहता है और ब्रह्मा उसे फिर दिन में बार २ भरता रहता है।
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