(भगवती के शृङ्गारर्थ दर्पण का ध्यान)
अंबर मणि अर्थात् सूर्य तेरे चरणों के समीप होने पर मुकुर (दर्पण) का काम दे रहा है । तेरे मुख के भय से उसने अपनी किरणों के समूह को अन्दर छुपा लिया है, इसलिये वह स्वच्छ है और तेरे मुख का प्रतिबिंब उसके हृदय कमल के सदृश सदा विकसित है (क्योंकि तेरा मुख कमल सदा विकसित रहता है और वह उसका प्रतिबिंब है) और उसको चन्द्रमा का भय नहीं है। (कमल सूर्य को देख कर खिलता है और रात्रि में मुरझा जाता है मानों उसे चन्द्रमा से भय लगता है)।
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