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सौन्दर्यलहरी • अध्याय 2 • श्लोक 49
ददाने दीनेभ्यः श्रियमनिशमाशानुसदृशी- ममन्दं सौन्दर्यप्रकरमकरन्दम् विकिरति । तवास्मिन् मन्दारस्तबकसुभगे यातु चरणे निमज्जन्मज्जीवः करणचरणः षट्चरणताम् ॥
इस तेरे चरण में जो मंदार वक्ष के पुष्पों के स्तबक जैसा सुन्दर है, मेरा ५ ज्ञानेन्द्रिय और १ अन्तः करण रुपी ६ चरण वाला यह जीव छ; चरणों वाला मधुकर बनकर डूबा रहे। तेरा चरण जो दीनों को उनकी आशा के अनुसार निरन्तर लक्ष्मी देता रहता है और सौन्दर्य राशि के मकरन्द को खूब फैलाता रहता है और मन्दार के पुष्पों के स्तबक सदृश सुभग है।
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