हे मां! तेरे चरण जो श्रुतियों की मुर्धा पर शिखरवत् रखे हैं, दया करके उनको मेरे शिर भी रख दे, जिनका चरणोदक शंकर की जटाजूट से निकली हुई गंगा है और जिनके तलवों में लगी लाक्षा की कान्ति हरि के चूडा में (केशों में) धारण की हुई अरुण मणि की कान्ति के सदृश है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सौन्दर्यलहरी के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
सौन्दर्यलहरी के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।