(उरुयुग्म का ध्यान)
हे गिरि सुते! आप अपने दोनों उरुओं मे गजेन्द्रों के मुंडों को और सुवर्ण के बने हुए केले के लंबे स्थंबों को जीतकर, पति को प्रणाम करते २ कठिन हो गये हैं ऐसे दोनों सुन्दरगोल घुटनो से बुद्धिमान हाथी के दोनों (मस्तक के) कुंभों को भी पराजित कर रही हैं।
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