(नितंब का ध्यान)
हे पार्वति! पर्वतराज हिमालय ने अपने नितंबों से काटकर अपना भारीपन और विस्तार तुझको दहेज में दिये थे, इसीलिये तेरे नितंब इतने विस्तीर्ण और भारी हैं, कि तेरे नितंब के भार से सारी पृथिवी की गति रुक गई है और तेरे विस्तार की अपेक्षा से पृथिवी छोटी दिखने लगी है।
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