(नाभि का ध्यान)
हे अचल तनये ! हर के क्रोध की ज्वालाओं से लिपटे हुए शरीर से कामदेव ने गहरे सरोवर सदृश तेरी नाभि में जब गोता लगाया, उनमे लता सदृश उठने वाले धूवे की जो रेखा बनी, उसे जन साधारण, हे जननि! तेरी नाभी के ऊपर उठने वाली रोमावलि समझते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सौन्दर्यलहरी के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
सौन्दर्यलहरी के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।