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सौन्दर्यलहरी • अध्याय 2 • श्लोक 28
गले रेखास्तिस्रो गतिगमकगीतैकनिपुणे विवाहव्यानद्धप्रगुणगुणसंख्याप्रतिभुवः । विराजन्ते नानाविधमधुररागाकरभुवां त्रयाणां ग्रामाणां स्थितिनियमसीमान इव ते ॥
(गले का ध्यान) हे गति, गमक और गीत में निपुणे! तेरे गले में पड़ी हुई तीन रेखायें जो विवाह के समय बांधी गई तीन सौभाग्यसूत्रों की लडियों से पड़ गई हैं, ऐसी प्रतीत हो रही हैं मानो वे नानाविध मधुर राग रागिनियों के तीनों ग्रामों पर गाने से उनके स्थिति नियम की सीमा के चिन्ह हों।
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